महाभारत 6.91.42
दशार्णाधिपतिश्चापि गजं भूमिधरोपमम्समास्थितोऽभिदुद्राव भगदत्तस्य वारणम्
daśārṇādhipatiścāpi gajaṃ bhūmidharopamamsamāsthito'bhidudrāva bhagadattasya vāraṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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