महाभारत 6.91.56
विकटः पुरुषो राजन्दीप्तास्यो दीप्तलोचनःरूपं विभीषणं कृत्वा रोषेण प्रज्वलन्निव
vikaṭaḥ puruṣo rājandīptāsyo dīptalocanaḥrūpaṃ vibhīṣaṇaṃ kṛtvā roṣeṇa prajvalanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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