महाभारत 6.91.59
निपपात द्विधा छिन्नं शूलं हेमपरिष्कृतम्महाशनिर्यथा भ्रष्टा शक्रमुक्ता नभोगता
nipapāta dvidhā chinnaṃ śūlaṃ hemapariṣkṛtammahāśaniryathā bhraṣṭā śakramuktā nabhogatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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