महाभारत 6.91.79भगदत्तोऽपि समरे तेन नागेन भारतविमृद्नन्पाण्डवबलं युधिष्ठिरमुपाद्रवत्bhagadatto'pi samare tena nāgena bhāratavimṛdnanpāṇḍavabalaṃ yudhiṣṭhiramupādravatइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें