महाभारत 6.91.81भीमसेनोऽपि समरे तावुभौ केशवार्जुनौआश्रावयद्यथावृत्तमिरावद्वधमुत्तमम्bhīmaseno'pi samare tāvubhau keśavārjunauāśrāvayadyathāvṛttamirāvadvadhamuttamamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें