महाभारत 6.92.14
अपराह्णे महाराज संग्रामः समपद्यतपर्जन्यसमनिर्घोषो भीष्मस्य सह पाण्डवैः
aparāhṇe mahārāja saṃgrāmaḥ samapadyataparjanyasamanirghoṣo bhīṣmasya saha pāṇḍavaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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