महाभारत 6.92.2
अब्रवीत्समरे राजन्वासुदेवमिदं वचःइदं नूनं महाप्राज्ञो विदुरो दृष्टवान्पुरा
abravītsamare rājanvāsudevamidaṃ vacaḥidaṃ nūnaṃ mahāprājño viduro dṛṣṭavānpurā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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