महाभारत 6.92.38
विरथो वध्यमानः स सौभद्रेण यशस्विनाअवप्लुत्य रथात्तूर्णं सव्रीडो मनुजाधिपः
viratho vadhyamānaḥ sa saubhadreṇa yaśasvināavaplutya rathāttūrṇaṃ savrīḍo manujādhipaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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