महाभारत 6.92.46
न्यहनच्च पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं रणेव्याकुलीकृतसंकल्पा युयुधुस्तत्र मानवाः
nyahanacca pitā putraṃ putraśca pitaraṃ raṇevyākulīkṛtasaṃkalpā yuyudhustatra mānavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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