महाभारत 6.92.47रणे चारूणि चापानि हेमपृष्ठानि भारतहतानामपविद्धानि कलापाश्च महाधनाःraṇe cārūṇi cāpāni hemapṛṣṭhāni bhāratahatānāmapaviddhāni kalāpāśca mahādhanāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें