महाभारत 6.92.7
दुर्योधनापराधेन शकुनेः सौबलस्य चक्षत्रिया निधनं यान्ति कर्णदुर्मन्त्रितेन च
duryodhanāparādhena śakuneḥ saubalasya cakṣatriyā nidhanaṃ yānti karṇadurmantritena ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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