महाभारत 6.93.17
आगमिष्ये ततः क्षिप्रं त्वत्सकाशमरिंदमततस्त्वं पुरुषव्याघ्र प्रकरिष्यसि संयुगम्
āgamiṣye tataḥ kṣipraṃ tvatsakāśamariṃdamatatastvaṃ puruṣavyāghra prakariṣyasi saṃyugam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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