महाभारत 6.93.25
आत्तशस्त्राश्च सुहृदो रक्षणार्थं महीपतेःप्रादुर्बभूवुः सहिताः शक्रस्येवामरा दिवि
āttaśastrāśca suhṛdo rakṣaṇārthaṃ mahīpateḥprādurbabhūvuḥ sahitāḥ śakrasyevāmarā divi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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