महाभारत 6.93.28
प्रगृह्णन्नञ्जलीन्नॄणामुद्यतान्सर्वतोदिशम्शुश्राव मधुरा वाचो नानादेशनिवासिनाम्
pragṛhṇannañjalīnnṝṇāmudyatānsarvatodiśamśuśrāva madhurā vāco nānādeśanivāsinām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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