महाभारत 6.93.2
समागम्य महाराज मन्त्रं चक्रूर्विवक्षितम्कथं पाण्डुसुता युद्धे जेतव्याः सगणा इति
samāgamya mahārāja mantraṃ cakrūrvivakṣitamkathaṃ pāṇḍusutā yuddhe jetavyāḥ sagaṇā iti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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