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महाभारत 6.93.31
स तैः परिवृतो राजा प्रदीपैः काञ्चनैः शुभैःशुशुभे चन्द्रमा युक्तो दीप्तैरिव महाग्रहैः
sa taiḥ parivṛto rājā pradīpaiḥ kāñcanaiḥ śubhaiḥśuśubhe candramā yukto dīptairiva mahāgrahaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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