महाभारत 6.93.39
दयया यदि वा राजन्द्वेष्यभावान्मम प्रभोमन्दभाग्यतया वापि मम रक्षसि पाण्डवान्
dayayā yadi vā rājandveṣyabhāvānmama prabhomandabhāgyatayā vāpi mama rakṣasi pāṇḍavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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