महाभारत 6.93.5
अवध्यमानास्ते चापि क्षपयन्ति बलं ममसोऽस्मि क्षीणबलः कर्ण क्षीणशस्त्रश्च संयुगे
avadhyamānāste cāpi kṣapayanti balaṃ mamaso'smi kṣīṇabalaḥ karṇa kṣīṇaśastraśca saṃyuge
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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