महाभारत 6.95.38
एवं तेऽपि महाव्यूहं प्रतिव्यूह्य सुदुर्जयम्पाण्डवाः समरे शूराः स्थिता युद्धाय मारिष
evaṃ te'pi mahāvyūhaṃ prativyūhya sudurjayampāṇḍavāḥ samare śūrāḥ sthitā yuddhāya māriṣa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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