महाभारत 6.95.51
ज्वलिताश्च महोल्का वै समाहत्य दिवाकरम्निपेतुः सहसा भूमौ वेदयाना महद्भयम्
jvalitāśca maholkā vai samāhatya divākaramnipetuḥ sahasā bhūmau vedayānā mahadbhayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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