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महाभारत 6.96.17
तं दृष्ट्वा क्षत्रियाः शूराः प्रतपन्तं शरार्चिभिःद्विफल्गुनमिमं लोकं मेनिरे तस्य कर्मभिः
taṃ dṛṣṭvā kṣatriyāḥ śūrāḥ pratapantaṃ śarārcibhiḥdviphalgunamimaṃ lokaṃ menire tasya karmabhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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