महाभारत 6.96.18तेनार्दिता महाराज भारती सा महाचमूःबभ्राम तत्र तत्रैव योषिन्मदवशादिवtenārditā mahārāja bhāratī sā mahācamūḥbabhrāma tatra tatraiva yoṣinmadavaśādivaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें