महाभारत 6.96.27
बहवश्च नरा राजंस्तस्य नादेन भीषिताःप्रियान्प्राणान्परित्यज्य निपेतुर्धरणीतले
bahavaśca narā rājaṃstasya nādena bhīṣitāḥpriyānprāṇānparityajya nipeturdharaṇītale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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