महाभारत 6.96.37
प्रतिविन्ध्यस्ततो रक्षो बिभेद निशितैः शरैःसर्वपारशवैस्तूर्णमकुण्ठाग्रैर्महाबलः
prativindhyastato rakṣo bibheda niśitaiḥ śaraiḥsarvapāraśavaistūrṇamakuṇṭhāgrairmahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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