महाभारत 6.96.5
रथिनं च रथात्तूर्णं हयपृष्ठाच्च सादिनम्गजारोहांश्च सगजान्पातयामास फाल्गुनिः
rathinaṃ ca rathāttūrṇaṃ hayapṛṣṭhācca sādinamgajārohāṃśca sagajānpātayāmāsa phālguniḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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