महाभारत 6.96.7तान्यनीकानि सौभद्रो द्रावयन्बह्वशोभततूलराशिमिवाधूय मारुतः सर्वतोदिशम्tānyanīkāni saubhadro drāvayanbahvaśobhatatūlarāśimivādhūya mārutaḥ sarvatodiśamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें