महाभारत 6.97.36तथैव पाण्डवा राजन्परिवार्य धनंजयम्रणाय महते युक्ता दंशिता भरतर्षभtathaiva pāṇḍavā rājanparivārya dhanaṃjayamraṇāya mahate yuktā daṃśitā bharatarṣabhaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें