महाभारत 6.97.43
तस्य द्रोणसुतश्चापं द्विधा चिच्छेद भारतअथैनं छिन्नधन्वानं ताडयामास सायकैः
tasya droṇasutaścāpaṃ dvidhā ciccheda bhārataathainaṃ chinnadhanvānaṃ tāḍayāmāsa sāyakaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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