महाभारत 6.97.4
नकुलः सहदेवो वा सात्यकिर्वा महारथःएतदाचक्ष्व मे सर्वं कुशलो ह्यसि संजय
nakulaḥ sahadevo vā sātyakirvā mahārathaḥetadācakṣva me sarvaṃ kuśalo hyasi saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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