महाभारत 6.98.30
तमुद्वीक्ष्य गदाहस्तं ततस्ते गजसादिनःपरिवव्रू रणे यत्ता भीमसेनं समन्ततः
tamudvīkṣya gadāhastaṃ tataste gajasādinaḥparivavrū raṇe yattā bhīmasenaṃ samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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