महाभारत 6.99.19
रथाश्च रथिभिर्हीना हतसारथयस्तथाविप्रद्रुताश्वाः समरे दिशो जग्मुः समन्ततः
rathāśca rathibhirhīnā hatasārathayastathāvipradrutāśvāḥ samare diśo jagmuḥ samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें