महाभारत 6.99.37
तां नदीं क्षत्रियाः शूरा हयनागरथप्लवैःप्रतेरुर्बहवो राजन्भयं त्यक्त्वा महाहवे
tāṃ nadīṃ kṣatriyāḥ śūrā hayanāgarathaplavaiḥpraterurbahavo rājanbhayaṃ tyaktvā mahāhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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