महाभारत 6.99.39
प्राक्रोशन्क्षत्रियास्तत्र दृष्ट्वा तद्वैशसं महत्दुर्योधनापराधेन क्षयं गच्छन्ति कौरवाः
prākrośankṣatriyāstatra dṛṣṭvā tadvaiśasaṃ mahatduryodhanāparādhena kṣayaṃ gacchanti kauravāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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