महाभारत 7.1.32
चुक्रुशुः कर्ण कर्णेति तत्र भारत पार्थिवाःराधेयं हितमस्माकं सूतपुत्रं तनुत्यजम्
cukruśuḥ karṇa karṇeti tatra bhārata pārthivāḥrādheyaṃ hitamasmākaṃ sūtaputraṃ tanutyajam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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