महाभारत 7.1.3
तस्य पुत्रो हि भगवन्भीष्मद्रोणमुखै रथैःपराजित्य महेष्वासान्पाण्डवान्राज्यमिच्छति
tasya putro hi bhagavanbhīṣmadroṇamukhai rathaiḥparājitya maheṣvāsānpāṇḍavānrājyamicchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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