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महाभारत 7.100.5
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
राजन्सेनासमुद्योगो रथनागाश्वपत्तिमान्तुमुलस्तव सैन्यानां युगान्तसदृशोऽभवत्
rājansenāsamudyogo rathanāgāśvapattimāntumulastava sainyānāṃ yugāntasadṛśo'bhavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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