महाभारत 7.101.13तदस्य राजन्कैकेयः प्रत्यवारयदच्युतःब्राह्मेणैव महाबाहुराहवे समुदीरितम्tadasya rājankaikeyaḥ pratyavārayadacyutaḥbrāhmeṇaiva mahābāhurāhave samudīritamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें