महाभारत 7.101.41
स तु द्रोणं महाराज छादयन्सायकैः शितैःअदृश्यमकरोत्तूर्णं जलदो भास्करं यथा
sa tu droṇaṃ mahārāja chādayansāyakaiḥ śitaiḥadṛśyamakarottūrṇaṃ jalado bhāskaraṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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