महाभारत 7.102.100
सोऽचिरेणैव कालेन तद्रथानीकमाशुगैःदिशः सर्वाः समभ्यस्य व्यधमत्पाण्डुनन्दनः
so'cireṇaiva kālena tadrathānīkamāśugaiḥdiśaḥ sarvāḥ samabhyasya vyadhamatpāṇḍunandanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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