महाभारत 7.102.25
धर्मराजवचः श्रुत्वा सारथिर्हयकोविदःरथं हेमपरिष्कारं भीमान्तिकमुपानयत्
dharmarājavacaḥ śrutvā sārathirhayakovidaḥrathaṃ hemapariṣkāraṃ bhīmāntikamupānayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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