महाभारत 7.102.2
वर्तमाने तथा रौद्रे संग्रामे लोमहर्षणेप्रक्षये जगतस्तीव्रे युगान्त इव भारत
vartamāne tathā raudre saṃgrāme lomaharṣaṇeprakṣaye jagatastīvre yugānta iva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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