महाभारत 7.102.31
तमब्रवीदश्रुपूर्णः कृष्णसर्प इव श्वसन्भीमसेनमिदं वाक्यं प्रम्लानवदनो नृपः
tamabravīdaśrupūrṇaḥ kṛṣṇasarpa iva śvasanbhīmasenamidaṃ vākyaṃ pramlānavadano nṛpaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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