महाभारत 7.102.88
साश्वसूतध्वजं यानं द्रोणस्यापोथयत्तदाप्रामृद्नाच्च बहून्योधान्वायुर्वृक्षानिवौजसा
sāśvasūtadhvajaṃ yānaṃ droṇasyāpothayattadāprāmṛdnācca bahūnyodhānvāyurvṛkṣānivaujasā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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