महाभारत 7.103.14
यथा हि गोवृषो वर्षं प्रतिगृह्णाति लीलयातथा भीमो नरव्याघ्रः शरवर्षं समग्रहीत्
yathā hi govṛṣo varṣaṃ pratigṛhṇāti līlayātathā bhīmo naravyāghraḥ śaravarṣaṃ samagrahīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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