महाभारत 7.103.32
हृद्गतं मनसा प्राह ध्यात्वा धर्मभृतां वरःदत्ता भीम त्वया संवित्कृतं गुरुवचस्तथा
hṛdgataṃ manasā prāha dhyātvā dharmabhṛtāṃ varaḥdattā bhīma tvayā saṃvitkṛtaṃ guruvacastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें