महाभारत 7.103.38
कौरवान्सहितान्सर्वान्गोग्रहार्थे समागतान्योऽजयन्मत्स्यनगरे दिष्ट्या पार्थः स जीवति
kauravānsahitānsarvāngograhārthe samāgatānyo'jayanmatsyanagare diṣṭyā pārthaḥ sa jīvati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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