महाभारत 7.103.39
कालकेयसहस्राणि चतुर्दश महारणेयोऽवधीद्भुजवीर्येण दिष्ट्या पार्थः स जीवति
kālakeyasahasrāṇi caturdaśa mahāraṇeyo'vadhīdbhujavīryeṇa diṣṭyā pārthaḥ sa jīvati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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