महाभारत 7.103.3
तं मृधे वेगमास्थाय परं परमधन्विनःचोदितास्तव पुत्रैश्च सर्वतः पर्यवारयन्
taṃ mṛdhe vegamāsthāya paraṃ paramadhanvinaḥcoditāstava putraiśca sarvataḥ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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