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महाभारत 7.103.6
तां पतन्तीं महावेगां दृष्ट्वा तेजोभिसंवृताम्प्राद्रवंस्तावकाः सर्वे नदन्तो भैरवान्रवान्
tāṃ patantīṃ mahāvegāṃ dṛṣṭvā tejobhisaṃvṛtāmprādravaṃstāvakāḥ sarve nadanto bhairavānravān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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