महाभारत 7.104.10
व्याक्षिपन्बलवच्चापमतिमात्रममर्षणःकर्णस्तु युद्धमाकाङ्क्षन्दर्शयिष्यन्बलं बली
vyākṣipanbalavaccāpamatimātramamarṣaṇaḥkarṇastu yuddhamākāṅkṣandarśayiṣyanbalaṃ balī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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